अदब से प्यार करना जानता हूँ
अदब से प्यार करना जानता हूँ
सबक लेकर निखरना जानता हूँ ।
रात जीवन में काली हो कितनी
रास्तों पर मै चलना जानता हूँ ।।
कोई मूरत पसीजे न कभी तो
गिराये आतिशी नफरत कभी तो ।फूल काँटो मे खिल भी जायेगा
चुभन की दर्द भी होये कभी तो ।।
रोज त्योहार गम में होता है
नीद जायेगी तो भी सोता है ।
पीर की नीर दृग भले बोले
चलना तो जिन्दगी में होता है ।।
रो के सम्पत्ति जो कमायी है
मै तो बस शून्य तू दहाई है ।
लव पे मुस्कान ले सुनाता हूँ
फिर भी मेरी नहीं कहायी है ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र
आँचल सोनी 'हिया'
18-Apr-2023 12:28 AM
Anupam
Reply
पृथ्वी सिंह बेनीवाल
25-Mar-2023 11:18 PM
शानदार
Reply
ऋषभ दिव्येन्द्र
25-Mar-2023 01:52 PM
वाह
Reply